देहरादून: अग्निवीर मैरिज रूल को लेकर युवाओं के बीच एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। देश की सुरक्षा व्यवस्था में युवाओं को जोड़ने के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत चयनित अग्निवीरों के लिए विवाह से जुड़े नियम अब एक बड़ी चुनौती बनते नजर आ रहे हैं। सेना ने साफ कर दिया है कि अग्निवीरों को न सिर्फ भर्ती के समय, बल्कि सेवा अवधि और स्थायी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहना अनिवार्य होगा।
भारतीय सेना द्वारा लागू नियमों के अनुसार, स्थाई अग्निवीर बनने के लिए उम्मीदवार का अविवाहित होना जरूरी है। इतना ही नहीं, चार साल की सेवा अवधि के दौरान भी विवाह करने की अनुमति नहीं है। यदि कोई अग्निवीर इस अवधि में शादी करता है, तो उसे स्थायी सैनिक बनने की प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है। अग्निपथ योजना के अंतर्गत चार साल की सेवा पूरी करने के बाद सीमित संख्या में अग्निवीरों को ही स्थायी कैडर में शामिल किया जाता है। सेना का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक अग्निवीर को स्थायी सैनिक के रूप में नियुक्ति नहीं मिल जाती, तब तक विवाह पर रोक रहेगी। यानी अगर कोई अग्निवीर जल्दबाजी में शादी करता है, तो उसका सेना में भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
क्यों सख्त हैं सेना के नियम?
सेना का मानना है कि शुरुआती वर्षों में जवानों को अनुशासन, प्रशिक्षण और पूर्ण समर्पण की जरूरत होती है। पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर रहकर ही वे बेहतर तरीके से देशसेवा कर सकते हैं। इसी कारण सेना ने अग्निवीरों के लिए विवाह को लेकर सख्त शर्तें तय की हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आने वाले कई अग्निवीरों के लिए यह नियम सामाजिक और पारिवारिक दबाव का कारण बन रहा है। चार से पांच साल तक शादी टालना कई युवाओं के लिए आसान नहीं है, लेकिन सेना में स्थायी करियर का सपना उन्हें इन शर्तों को मानने पर मजबूर कर रहा है।








