राजकीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक संचालित आनंदम पाठ्यचर्या को विद्यालयों की समय-सारिणी में पहले पीरियड में अनिवार्य कर दिया गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षा विभाग ने सभी जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण वंदना गर्ब्याल की ओर से जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि शासनादेश 18 दिसंबर 2019 के अनुसार आनंदम पाठ्यचर्या के लिए प्रथम पीरियड निर्धारित है और इसका अक्षरशः’ पालन सुनिश्चित किया जाए। सभी मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, डायट प्राचार्य, खंड एवं उप शिक्षा अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करते हुए प्रत्येक माह प्रगति रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार प्रत्येक जनपद में मुख्य शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में आनंदम जिला संदर्भ समूह तथा प्रत्येक विकासखंड में ब्लाक संदर्भ समूह का गठन किया जाएगा। साथ ही विकासखंड स्तर पर किसी सक्रिय शिक्षक या प्रधानाचार्य को आनंदम नोडल अधिकारी नामित कर कार्यक्रम की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी। यह बात भी सामने आया कि कई विद्यालयों में आनन्दिनी शिक्षक संदर्शिका की कमी है और शिक्षकों का समुचित प्रशिक्षण नहीं हो पाया है। इसे गंभीरता से लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारियों को संदर्शिका की मांग और प्रशिक्षण आवश्यकता की जानकारी डायट एवं राज्य नोडल अधिकारी को समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट 2026-27 में आनंदम पाठ्यचर्या के तहत प्रशिक्षण, संदर्शिका पुनर्मुद्रण और अनुश्रवण के लिए अलग बजट प्रविधान करने को भी कहा है। डायट, विकासखंड और संकुल स्तर पर आयोजित प्रत्येक प्रशिक्षण व बैठक में आनंदम अभिमुखीकरण सत्र अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। निदेशक एससीईआरटी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास के लिए आनंदम पाठ्यचर्या एक महत्वपूर्ण पहल है और इसके क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।









