जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में शादी के दौरान बढ़ती फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के लिए ग्रामीणों की ओर से बैठक कर महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले गहनों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया जा रहा है, ताकि समाजहित में दिखावा और आर्थिक बोझ कम हो।
हालांकि, कुछ महिलाओं को इस पर आपत्ति है। वे अब इसके विरोध में मुखर होने लगी हैं। उनका कहना है कि ऐसा निर्णय या पाबंदी महिलाओं पर असमानता थोपता है और पुरुषों की फिजूलखर्ची (जैसे महंगी शराब) पर रोक नहीं लगाता।
जबकि सोना एक निवेश है। ऐसे में इस तरह की पाबंदी शराब पर ही लागू करनी चाहिए। जाहिर है महिलाओं के इस रुख से यह मामला बहस का मुद्दा बन गया है।
पहले जौनसार बावर क्षेत्र में मंगलसूत्र नहीं पहने जाते थे। पहले सोने के जेवर में तुंगल, नाक की फूली, बुलाक, उतरेई, कट्टी व चांदी का सूच व कच पहना जाता था, लेकिन अब पंचायतों के इस फैसले पर महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखनी शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि ग्रामीणों की बैठकों में महिलाओं को सिर्फ तीन गहनें पहनने की ही छूट दी जा रही है। हाल ही में वार्डों के निरीक्षण के दौरान विधायक मुन्ना सिंह चौहान के समक्ष एक महिला ने इस पर सवाल उठाए।
कहा कि महिलाओं के ज्यादा गहने पहनने पर तो प्रतिबंध लगाया जा रहा है, लेकिन पुरुषों के शराब पीने पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही है।
समाज में शराब समेत कई कुरीतियां हैं। इनका सीधा असर पूरे परिवार पर पड़ता है, ऐसे में गहनों को ही निशाना बनाना न्याय संगत नहीं है।
इस पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने सामाजिक निर्णयों में सीधे हस्तक्षेप करने से बचते हुए कहा कि ऐसे फैसले समाज और पंचायतों को आपसी सहमति से ही लेने चाहिए। विधायक यह कहते हुए आगे बढ़ गए कि पंचायतों द्वारा लिए गए सामाजिक निर्णयों में राजनीतिक दखल उचित नहीं है।








