सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका भी खारिज होने के बाद बिना टीईटी के करीब 12 हजार शिक्षकों की सेवा पर तलवार लटक गई है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ एक वर्ष से कड़ा विरोध कर रहा है लेकिन विरोध का न्यायालय की सुनवाई पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता दिख रहा है।
शिक्षक संगठन की मानें तो इस समस्या का समाधान के सीमित विकल्प हैं। बेसिक और जूनियर के वर्ष 2010 से पूर्व के शिक्षक टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करें या फिर प्रदेश सरकार शिक्षकों की सेवा नियमावली में संशोधन करे।
संगठन नियमावली में संशोधन की पैरवी कर रहे हैं। उनका कहना है कि 55 वर्ष से कम आयु के करीब 12 हजार शिक्षकों की सेवा चली जाए, यह शिक्षकों और शिक्षा विभाग, दोनों के लिए बड़ा धक्का होगा।
उधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक डा. मुकुल कुमार सती ने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय है। राज्य सरकार इस मामले में जो भी निर्णय लेगी, विभाग उस पर अमल करेगा।
सरकार शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय ऐसे निर्णय ले रही है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। यदि इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ तो शिक्षक आंदोलन तेज करेंगे, जिसका असर शिक्षा व्यवस्था और सरकार दोनों पर पड़ सकता है।
– सुभाष चौहान राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ








