उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का बढ़ता प्रकोप, 24 घंटे में 58 नए मरीज; डेंगू और कोरोना के मामले भी सामने आए

देहरादून। उत्तराखंड में बारिश और बदलते मौसम के बीच मौसमी बीमारियों का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान स्वाइन फ्लू के 58 नए मरीज सामने आए हैं। इनमें 38 मामले देहरादून और 20 मामले अन्य जिलों से हैं।

नए मामलों के सामने आने के बाद प्रदेश में स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 271 हो गई है। इनमें से 149 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 120 मरीजों का इलाज चल रहा है। अब तक स्वाइन फ्लू से दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

बच्चों और बुजुर्गों में भी संक्रमण

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, स्वाइन फ्लू का संक्रमण अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों में पाया जा रहा है। 1 से 10 वर्ष की आयु के 45 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वहीं 61 से 90 वर्ष की आयु के 86 बुजुर्ग भी स्वाइन फ्लू की चपेट में आए हैं।

कुल संक्रमित मरीजों में 143 पुरुष और 128 महिलाएं शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार पुरुष मरीजों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है।

स्वाइन फ्लू की जांच में तेजी

मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने के चलते स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध मामलों की जांच तेज कर दी है। विभाग के अनुसार अब तक स्वाइन फ्लू की जांच के लिए 521 सैंपल लिए गए हैं। इनमें देहरादून से 182 और अन्य जिलों से 89 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं।

कोरोना संक्रमण के 39 मामले

स्वाइन फ्लू के साथ प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले भी सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक कोरोना की जांच के लिए 303 सैंपल लिए गए हैं, जिनमें 39 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें 16 मामले देहरादून और 23 मामले अन्य जिलों से सामने आए हैं।

डेंगू के 129 मरीजों की पुष्टि

प्रदेश में डेंगू को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग निगरानी बढ़ाए हुए है। अब तक डेंगू की जांच के लिए करीब 24,844 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें 129 लोगों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमितों में 63 मरीज देहरादून और 66 अन्य जिलों के हैं।

डेंगू संक्रमित मरीजों में से 112 लोग उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 17 मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने बदलते मौसम और मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए जांच, निगरानी और आवश्यक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया है।

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