उत्तराखंड ने रुद्राक्ष हब बनने की दिशा में तैयार किया रोडमैप, सीएम धामी ने राज्य नीति बनाने के दिए निर्देश

देहरादून, 5 सितंबर 2026: उत्तराखंड रुद्राक्ष की खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में रुद्राक्ष की संगठित एवं व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

यह पहल टिहरी गढ़वाल के विधायक किशोर उपाध्याय के नेतृत्व में गए एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा नेपाल में किए गए विस्तृत अध्ययन के बाद सामने आई है। प्रतिनिधिमंडल में कृषि वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक लेखक डॉ. रमेश सिंह पाल तथा रुद्राक्ष विशेषज्ञ प्रिंस अग्रवाल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में रुद्राक्ष की खेती, फसल प्रबंधन, कटाई के बाद की प्रसंस्करण व्यवस्था, विपणन प्रणाली, मिट्टी की विशेषताओं तथा किसान आधारित उत्पादन मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया।

क्षेत्रीय अध्ययन और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में रुद्राक्ष की खेती की संभावनाओं को लेकर लगभग 200 पृष्ठों की तकनीकी रिपोर्ट तथा इसके विकास और विस्तार के लिए एक व्यापक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया। यह रिपोर्ट 9 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रस्तुत की गई।

सिफारिशों पर विचार के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर 31 अगस्त 2026 को उत्तराखंड शासन के उप सचिव द्वारा उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को रुद्राक्ष की संगठित खेती के विकास के लिए व्यापक राज्य नीति तैयार करने के संबंध में पत्र जारी किया गया।

प्रस्तावित पहल का उद्देश्य रुद्राक्ष को एक व्यावसायिक रूप से लाभकारी फसल के रूप में विकसित करना तथा खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और संबंधित उद्योगों तक एक समग्र वैल्यू चेन तैयार करना है। इसके माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के लिए टिकाऊ और अपेक्षाकृत उच्च मूल्य वाली आजीविका के अवसर पैदा करने के साथ-साथ उत्तराखंड के आध्यात्मिक पर्यटन और वेलनेस अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने की परिकल्पना की गई है।

भारत में घरेलू रुद्राक्ष मांग को पूरा करने के लिए आयात पर काफी निर्भरता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में खपत होने वाले 95 प्रतिशत से अधिक रुद्राक्ष का आयात नेपाल और इंडोनेशिया से किया जाता है। वर्ष 2025 में दोनों देशों से रुद्राक्ष के आयात का अनुमानित मूल्य लगभग 20.14 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। यह स्थिति देश में रुद्राक्ष के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित करती है।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल किशोर उपाध्याय, डॉ. रमेश सिंह पाल और प्रिंस अग्रवाल ने प्रस्तावित नीति पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पहल उत्तराखंड में रुद्राक्ष आधारित एक समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की नींव रख सकती है, जिसमें खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, उद्योग, विपणन और आध्यात्मिक पर्यटन को एक साथ जोड़ा जा सकेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, उपयुक्त क्षेत्रों का चयन और एक सुव्यवस्थित नीति के माध्यम से उत्तराखंड रुद्राक्ष उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।

इस पहल की व्यापक परिकल्पना उत्तराखंड को “हिमालयन रुद्राक्ष हब”के रूप में विकसित करने की है। इसके माध्यम से रुद्राक्ष के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण उद्यमिता, किसानों की आय, आध्यात्मिक पर्यटन और टिकाऊ आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करने का लक्ष्य है।

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