देहरादून में अवैध सिम बॉक्स से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, दो मैनेजर गिरफ्तार

क्रेडिट कार्ड के नाम पर ग्राहकों को धमकाकर की जा रही थी धोखाधड़ी, लैपटॉप से कई बैंकों के ग्राहकों का डेटा बरामद; 30 से अधिक युवक-युवतियां कर रहे थे काम

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ और देहरादून पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए देहरादून में अवैध सिम बॉक्स के माध्यम से संचालित हो रहे एक संदिग्ध कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में कंपनी के मैनेजर और रीजनल मैनेजर को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स, 45 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, दो राउटर, दो एटीएम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। लैपटॉप की जांच में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, यस बैंक, आरबीएल और पूनावाला फाइनेंस समेत कई वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड से संबंधित डेटा मिला है।

एसटीएफ के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DOT) से मिले इनपुट के आधार पर देहरादून में संदिग्ध सिम बॉक्स के संचालन की जांच की जा रही थी। संबंधित मोबाइल नंबरों के खिलाफ चक्षु पोर्टल और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर शिकायतें भी दर्ज पाई गई थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह टेलीकॉम सेटअप दूरसंचार विभाग के निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक साइबर शान्तनु परासर के नेतृत्व में टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्य जुटाने के बाद एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के साथ जीएमएस रोड स्थित कमला पैलेस के निकट कैरियर हाउस बिल्डिंग में संचालित सिंह एसेट रिकॉन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (SARS) के कार्यालय में छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान कार्यालय में अवैध रूप से कॉल सेंटर संचालित होने की पुष्टि हुई। यहां कॉलिंग के लिए DINSTAR कंपनी का 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स इस्तेमाल किया जा रहा था। दूरसंचार विभाग की अधिकारी ने उपकरण की जांच कर बताया कि इसके जरिए कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान छिपाई जा सकती है और इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी समेत अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है।

क्रेडिट कार्ड के नाम पर ग्राहकों को धमकाकर वसूली का आरोप

पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर से लोगों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने और उनसे जुड़े लाभ बताने के नाम पर कॉल की जाती थी। आरोप है कि ग्राहकों से जल्द धनराशि जमा कराने के लिए कई बार धमकी भरे फोन किए जाते थे और गाली-गलौच कर दबाव बनाया जाता था। इस तरह ग्राहकों को डराकर उनकी संवेदनशील जानकारी और धनराशि हासिल करने का प्रयास किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि कॉल सेंटर में 30 से अधिक युवक-युवतियां काम कर रहे थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने करीब 39 अन्य कर्मचारियों के काम करने की जानकारी दी। इन कर्मचारियों को कमीशन के आधार पर भुगतान किया जाता था।

व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से की जा रही थी कॉलिंग

जांच में दूरसंचार विभाग और TRAI के निर्धारित दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का मामला भी सामने आया। पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर द्वारा निर्धारित 1600 नंबर सीरीज का इस्तेमाल करने के बजाय व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से ग्राहकों को कॉल की जा रही थी। इससे कॉल सेंटर की वास्तविक पहचान छिपाने और ग्राहकों को भ्रमित करने की आशंका जताई गई है।

दो आरोपी गिरफ्तार, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद

पुलिस ने इस मामले में कंपनी के मैनेजर लक्ष्मण प्रसाद और रीजनल मैनेजर जगमोहन सिंह रावत को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • लक्ष्मण प्रसाद: पुत्र श्रीपत, निवासी सेखन फाटक, चरखारी स्टेट, महोबा, उत्तर प्रदेश। वर्तमान पता चंद्रमणि फेस-2, थाना पटेलनगर, देहरादून। (कंपनी मैनेजर)
  • जगमोहन सिंह रावत: पुत्र धर्मेंद्र सिंह रावत, निवासी डीए-87, तृतीय तल, माता चौक, रंगपुरी, थाना बसंत कुंज, नई दिल्ली। (कंपनी रीजनल मैनेजर)

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और कार्यालय से एक DINSTAR UG2000-VG-32G मॉडल का 32 स्लॉट सिम बॉक्स, 45 सिम कार्ड, एक DELL लैपटॉप, दो XSTREAM FIBER राउटर, SK Hynix कंपनी की 4 GB RAM और एसबीआई व यस बैंक के दो एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।

साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज

पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में मुकदमा अपराध संख्या 49/2026 दर्ज किया है। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(1), 61(2), 3(5), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(C), 66(D) और दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 42(1) व 42(3) के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कहा कि उत्तराखंड में साइबर अपराध और अवैध दूरसंचार गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी, ओटीपी और अन्य संवेदनशील विवरण साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल से सतर्क रहें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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