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Sunday, April 6, 2025
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गेठी कंद में छुपा औषधीय खजाना , क्या है इसका विलुप्त होने का कारण

देवभूमि उत्तराखंड में कई प्रकार के कंद ,फल सब्जी पेड़ ,पौधे पाए जाते है ,जो औषधीय गुणों से भरपूर है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के मौसम ख़त्म होने के समय अक्टूबर और नवंबर माह में एक विशेष सब्जी जो की बेल में लगती है और आलू के आकार की दिखाई देते है। इसे पहाड़ी भाषा मे गेठी की सब्जी बोलते हैं। कंद रूप की यह गेठी सब्जी गर्म तासीर और औषधीय गुणों से भरपूर होती है।उत्तराखंड तो देवभूमी के साथ- साथ एक दिव्य भूमि भी है। क्योकि प्रकृति ने इस भूमि पर संसार की हर प्रकार की दिव्य औषधियों का संकलन दिया है। ये दिव्य औषधियां फल, फूल और कंद रूपों में यहाँ पर मौजूद है। लेकिन जानकारी के आभाव में हम इनको भूलते जा रहे हैं ,या फिर हो सकता है, की हमें इनका प्रयोग करना नही आता हैं । जिसका मुख्य कारण है की ये विलुप्ति होती जा रही हैं । इन औषधीय कंद मूलो में एक प्रमुख कंद है,जो कि पहाड़ों में खुद ही उग जाता है ,इसे उगाने की जरूरत नहीं पड़ती। यही कारण है की यह बस बर्बाद होता है।आपको बता दे की गेठी की उत्पत्ति का स्थान दक्षिण एशिया माना जाता है। यह डायोस्कोरिएसी कुल का पौधा है और गेठी का वानस्पतिक नाम डायोस्कोरिया बल्बीफेरा है। इसे संस्कृत में वरही कंद ,मलयालम में कचिल और मराठी में दुक्कर कंद कहते हैं। हिंदी में इसे गेंठी, गेठी या गिन्ठी के नाम से जाना जाता हैं । वहीं उत्तराखंड में भी इसे गेठि या गेंठी, गेठी ही कहते हैं। अंग्रेजी में गेठी को एयर पोटैटो कहा जाता हैं।भारत में गेठी की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमे गेठी के साथ डा बेल्फिला ( तरुड़ कंद ) भी पहाड़ो में पाया जाता है। भारत के आयुर्वेद ग्रन्थ चरक संहिता और सुश्रुतसंहिता में गेठी को दिव्य अठारह पौधों में से एक स्थान दिया गया है ।

आपको बता दे की चवनप्राश बनाने में भी गेठी का प्रयोग किया जाता है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में गेठी का प्रयोग मुख्यतः केवल सब्जी के रूप में किया जाता है। इसका स्वाद आलू की अपेक्षा थोड़ा कसैला होता है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अक्टूबर नवंबर में पहाड़ी लोग गेठी इकट्ठा करके रख लेते हैं और फिर शरद ऋतु में इसको उबाल कर सब्जी के रूप में प्रयोग करते हैं।बता दे की गेठी की तासीर गर्म होती है। ठंड के मौसम में इसका प्रयोग बहुत लाभदायक होता है। पहाड़ी लोग इस गेठी को गर्म राख में पका कर सेवन करते हैं । गेठी को खांसी की अचूक औषधि माना जाता है। गेठी कई रोगों में रामबाण उपचार है। आपको बता दे की गेठी कंद ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। गेंठी में शर्करा(ग्लूकोज ) और रेशेदार फाइबर अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे खून में ग्लूकोज का स्तर बहुत धीरे बढ़ता है।
गेंठी में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं,जिनके कारण शरीर मे कोलस्ट्रोल कम बढ़ता है । एयर पोटैटो मोटापा घटाने में लाभदायक है।

 


इसमे विटामिन बी प्रचुर मात्रा में मिलता है। जो बेरी बेरी और त्वचा रोगों की रोकथाम में सहायक होता है।
गेंठी में कॉपर ,लोहा,पोटेशियम ,मैगनीज आदि खनिज ( मिनरल्स ) पाए जाते हैं। जिसमे से पोटेशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखता है और कॉपर रूधिर कणिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है।
गेठी की पत्तियों और टहनियों के लेप से फोड़े फुंसियों में लाभ मिलता है।
गेंठी को उबालकर सलाद या सब्जी रूप में खाने से खांसी व जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।
गेठी के तनों व पत्तियों के अर्क में घाव भरने की क्षमता होती है। और इसके अर्क में कैंसर कोशिकाओं को मारने की क्षमता भी होती है। जिससे कैंसर जैसी भयानक बीमारी में लाभ मिलता है।
इसके पत्तियों के लेप से सूजन व जलन में लाभ मिलता है।
इसकी गांठों में स्टेरॉयड मिलता है जो कि स्टेरोएड हार्मोन और सेक्स हार्मोन बनाने के काम आता है।
गेठी बबासीर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नही है। दस्त के लिए भी यह अति लाभदायक है।
वहीं गेठी में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते है और जिस कारण इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भरपूर रहती है।ये ही नहीं बल्कि गेठी कैंसर में भी फायदेमंद होता ही है।

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