11वीं माँ धारी देवी एवं भगवान श्री नागराज देव डोली शोभा यात्रा आयोजन

उत्तराचंल प्रेस क्लब, देहरादून में आज 11वीं माँ धारी देवी एवं भगवान श्री नागराज देव डोली शोभायात्रा–2026 को लेकर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता माँ धारी देवी नागराज उपासक आचार्य श्री सुरेन्द्र प्रसाद सुंदरियाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में संपन्न हुई।इस अवसर पर श्री ईष्ट देव सेवा ट्रस्ट, माँ धारी देवी शोभायात्रा समिति, विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों, कीर्तन मंडलियों तथा प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।11 जनवरी से होगी देव डोली शोभायात्रा की शुरुआत
आचार्य श्री ने जानकारी दी कि 11वीं माँ धारी देवी एवं भगवान श्री नागराज देव डोली शोभायात्रा का शुभारंभ
11 जनवरी 2026 (रविवार) को प्रातः 10 बजे,
नेहरू कॉलोनी, देहरादून से किया जाएगा।
शोभायात्रा से पूर्व माँ भगवती का श्रृंगार पूजन, हवन एवं आरती होगी। इसके पश्चात उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पौड़ी गढ़वाल के प्रसिद्ध दीपक दास जी द्वारा पंच नाम देवताओं का ढोल-सागर से आवाहन किया जाएगा। मंडाण वार्ता के उपरांत मुख्य अतिथि द्वारा देव डोली को देव ध्वजा दिखाकर अग्रिम पड़ाव के लिए रवाना किया जाएगा।
उत्तराखंड से वृन्दावन तक देव डोली यात्रा
देव डोली शोभायात्रा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा होते हुए श्रीधाम वृन्दावन पहुंचेगी। प्रमुख पड़ावों में—
हर्रावाला शिव मंदिर,
बुल्लावाला (रात्रि विश्राम),
आई.एस.बी.टी. ऋषिकेश,
हरिद्वार (हर की पौड़ी पर शाही स्नान – 15 जनवरी),
रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर,
मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम शामिल हैं।
23 जनवरी 2026, बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मुख्य अखाड़ों एवं साधु-संतों की उपस्थिति में श्रीधाम वृन्दावन में दिव्य देव स्नान संपन्न होगा।
24–25 जनवरी को देहरादून में भव्य आयोजन
24 जनवरी 2026 को देव डोली देहरादून वापसी करेगी, जहां नेहरू कॉलोनी पर भव्य स्वागत, शोभायात्रा, भजन संध्या एवं सम्मान समारोह आयोजित होगा।
25 जनवरी 2026 को धार्मिक यज्ञ-अनुष्ठान, हवन, कन्या पूजन एवं विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।
देव संस्कृति के संरक्षण का संदेश
विशेष वार्ता में आचार्य मधुसूदन जुयाल जी ने बताया कि यह देव डोली यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि
उत्तराखंड की देव संस्कृति के संरक्षण, सनातन धर्म के जन-जागरण, और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम है।
महाराज श्री ने युवाओं से उत्तराखंड के सिद्धपीठों, शक्तिपीठों और देव संस्कृति को जानने-समझने तथा पर्यटन व सांस्कृतिक जागरण से जुड़ने का आह्वान किया।
मुख्य उपस्थित
इस अवसर पर आचार्य मधुसूदन जुयाल, पं. कृष्णा जोशी, मुकेश रतूड़ी, राजकुमार, अनुज, सुबोध लखेड़ा, प्रदीप जोशी, श्रीमती देवेश्वरी नयाल, मेघा रानी चंदेल, नंदी काला, गंगा बिष्ट, वैशाली रावत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं पत्रकार उपस्थित रहे।

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