उत्तराखड : फूलों की घाटी की खूबसूरत वादियों के बीच खिले हैं कई जहरीले पुष्प , बिना जानकारी के छूने से करे परहेज

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी के दीदार करने को जा रहे हैं तो हो जाये सावधान । क्योंकि घाटी में कई विषैले फूल भी खिले हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। वन विभाग ने भी पर्यटकों को बिना जानकारी किसी भी फूल या वनस्पति से छेड़छाड़ न करने की सलाह दी है।

आपको बता दे की फूलों की घाटी ग्रीष्मकाल में छह माह तक पर्यटकों के लिए खोली जाती है। घाटी में 350 से अधिक प्रजातियों के पुष्प खिलते हैं।तो वहीं घाटी के दीदार के लिए अगस्त और सितंबर माह सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान घाटी में सबसे ज्यादा फूल खिले रहते हैं।
मौजूदा समय में 200 से अधिक प्रजातियों के पुष्प घाटी में खिले हुए हैं। वन विभाग ने घाटी में एकोनिटम बालफोरी और सेनेसियो ग्रैसिलिफ्लोरस नाम के फूल चिह्नित किए हैं, जो की काफी जहरीले होते हैं। सेनेसियो एक दुर्लभ प्रजाति का फूल भी है, जो लंबे समय बाद घाटी में खिला है। किसी ने यदि यह फूल तोड़ लिया या इसको मुंह में रख लिया तो यह जानलेवा भी हो सकता है।
घाटी में खिले दुर्लभ प्रजाति के पुष्प
फूलों की घाटी में कई दुर्लभ प्रजाति के फूल खिले हुए हैं। इनमें सबसे मनमोहक फूल मोरिना लोंगिफोलिया है। यह दूर-दूर तक अपनी महक छोड़ता है।जिससे वहां का वातावरण महक उठता है और सभी को अपनी इस छठा से मन्त्रमुक्त कर देते है। इसके अलावा घाटी में विलुप्तप्राय श्रेणी में रखे गए कोरीडालिस कॉर्नुटा के फूल भी खिला हुआ है। इसके साथ ही घाटी में विभिन्न प्रजातियों के पुष्प खिले हुए हैं।
वहीं फूलों की घाटी से लेकर हेमकुंड साहिब तक जगह-जगह ब्रह्मकमल खिले हुए हैं। पिछले दो वर्ष से कोरोना संक्रमण के चलते हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा बंद है। मानवीय आवाजाही कम होने से यहां ब्रह्मकमल बहुत अधिक में खिले हुए हैं। ब्रह्मकमल हेमकुंड के आस्था पथ पर भी खिले हुए हैं। यात्रा के दौरान ब्रह्मकमल का बड़ी मात्रा में दोहन हो जाता था, परन्तु इस बार यात्रा का संचालन न होने से घांघरिया से कुछ दूरी से ही ब्रह्मकमल दिखाई दे रहे हैं।

फूलों की घाटी जैव विविधता से भरी है। यहां कई प्रजाति के फूल और वनस्पति पाई जाती है, जिनमें कई दुर्लभ प्रजाति के पुष्प भी हैं। घाटी में दो ऐसे फूलों को चिन्हित किया गया है, जो विषैले हैं। पर्यटकों को घाटी में एंट्री करने पर सावधानी बरतनी चाहिए, किसी भी वनस्पति को छूने या तोड़ने से बचना चाहिए।
– अमित कंवर, निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व, गोपेश्वर, चमोली।

 

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