भिटौली कलेक्शन के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

-सुनारीका गोल्ड एंड डायमंड के पहाड़ी विरासत ज्वैलरी शो रूम का भव्य शुभारम्भ

– भिटौली कलेक्शन के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

देहरादून – उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और पहाड़ी विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “सुनारीका गोल्ड एंड डायमंड” के भव्य ज्वैलरी शो रूम का शुभारम्भ रविवार को राजपुर रोड, जाखन, देहरादून में भव्य एवं गरिमामय समारोह के बीच सम्पन्न हुआ। यह शो रूम उत्तराखंड की पौराणिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और पहाड़ी जीवनशैली से प्रेरित ज्वैलरी डिजाइनों का अनूठा संग्रह प्रस्तुत करता है, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक स्वरूप में नई पहचान देगा।

शो रूम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि अशोक बंसल, श्री रोशन लाल मित्तल और श्री बाबू लाल बंसल द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर किया गया। उद्घाटन अवसर पर राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक जगत से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल को उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला, पहाड़ी रंगों एवं सांस्कृतिक प्रतीकों से सजाया गया, जिसने पूरे समारोह को एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया।

उत्तराखंड की संस्कृति को समर्पित ज्वैलरी का अनूठा संगम –
इस नव-स्थापित शो रूम में पहाड़ी विरासत से जुड़े पौराणिक आभूषणों के आधुनिक रूप, देवी-देवताओं से प्रेरित डिज़ाइन, पारंपरिक नथ, गलोबंद, पौंची, चांदी एवं सोने की विशिष्ट कलाकृतियां, साथ ही डायमंड ज्वैलरी का आकर्षक संग्रह उपलब्ध कराया गया है। ज्वैलरी डिजाइनों में उत्तराखंड की लोक कथाओं, सांस्कृतिक प्रतीकों और पारंपरिक शिल्प कला की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि अशोक बंसल ने कहा कि “सुनारीका गोल्ड एंड डायमंड द्वारा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को ज्वैलरी के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास अत्यंत सराहनीय है। यह शो रूम केवल एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान, परंपरा और लोक संस्कृति को संजोने का सशक्त माध्यम है।”

उन्होंने कहा कि जब स्थानीय कला और परंपरा को इस तरह के ब्रांड का सहयोग मिलता है, तो इससे राज्य के कारीगरों, कलाकारों और संस्कृति तीनों को मजबूती मिलती है। मुख्य अतिथि ने आशा व्यक्त की कि सुनारीका जैसे प्रयास उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान “सुनारीका गोल्ड एंड डायमंड” द्वारा “भिटौली कलेक्शन” की विशेष शुरुआत की गई। यह कलेक्शन उत्तराखंड की उस पारंपरिक भावना को समर्पित है, जिसमें मायके से बेटी को भेंट स्वरूप उपहार भेजे जाते हैं। इस कलेक्शन में भावनात्मक जुड़ाव के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

सुनारीका गोल्ड एंड डायमंड के सीईओ प्रदीप बंसल ने कहा कि देहरादून में यह “सुनारीका” का चौथा शो रूम है और इसका उद्देश्य उत्तराखंड की पारंपरिक ज्वैलरी को एक सशक्त और प्रतिष्ठित ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने कहा, “सुनारीका उत्तराखंड का पहला ऐसा ज्वैलरी ब्रांड है, जो विशेष रूप से राज्य की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक कला और लोक विरासत से प्रेरित ज्वैलरी का निर्माण एवं प्रस्तुतीकरण कर रहा है। यह उत्तराखंडियों का पहला ब्रांडेड और पहला हॉलमार्क ज्वैलरी स्टोर है, जो शुद्धता, गुणवत्ता और विश्वास का प्रतीक है।”
उन्होंने आगे कहा कि सुनारीका स्थानीय कारीगरों की पारंपरिक कला को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक डिजाइनों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

वहीं दीपांशु बंसल ने कहा कि सुनारीका केवल एक व्यावसायिक ब्रांड नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का एक प्रयास है।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड की पारंपरिक ज्वैलरी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और स्थानीय कारीगरों की कला को वैश्विक मंच मिले। भिटौली कलेक्शन इसी सोच का परिणाम है, जिसमें भावना, परंपरा और गुणवत्ता, तीनों का विशेष ध्यान रखा गया है।”

उद्घाटन समारोह में उपस्थित अतिथियों एवं ग्राहकों ने शो रूम में प्रदर्शित ज्वैलरी की भूरी-भूरी प्रशंसा की और इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने वाला कदम बताया। लोगों ने कहा कि इस प्रकार की पहल से स्थानीय कला, संस्कृति और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

उद्घाटन समारोह में सुनील खेड़ा, निकेत अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल, ममता गर्ग, अर्पित अग्रवाल, पुरूषोतम बंसल, प्रेम बंसल, कैलाश अग्रवाल, चंद्र प्रकाश मित्तल, तरुण मित्तल, संगीत पाण्डेय, संदीप जोशी, रानी चौहान, पूजा, सरिता, अभिमन्यु, मोहित, श्वेता मुंजाल, प्रांशुल मित्तल, हनुमान गर्ग, राकेश, सचिन सिंघल, गौतम कथूरिया सहित काफी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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