उत्तराखंड में 2100 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का रास्ता साफ, 2815 को प्रवक्ता पद पर मिलेगा प्रमोशन

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सरकारी बेसिक स्कूलों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। जल्द ही प्रदेशभर के लगभग 2100 प्राथमिक शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही 2815 प्रवक्ता पदों पर एलटी (स्नातक स्तर) शिक्षकों को अंतरिम प्रमोशन दिया जाएगा।

बीते शुक्रवार को देहरादून राजभवन में शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया था । इस समारोह में अलग-अलग जिलों के कई शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह के बाद शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षा विभाग से सम्बंधित कुछ अहम घोषणाएं की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जल्द ही लगभग 2100 प्राथमिक शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक सेवा नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होते ही जिलावार भर्ती की औपचारिक शुरुआत कर दी जाएगी।

2815 एलटी शिक्षकों को मिलेगा प्रमोशन

उन्होंने कहा कि इस नई भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य के प्रत्येक बेसिक स्कूल में कम से कम दो स्थायी शिक्षक उपलब्ध होंगे। इससे छोटे ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। इसके अलावा शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में 2815 प्रवक्ता पदों पर एलटी (स्नातक स्तर) शिक्षकों को अंतरिम प्रमोशन दिया जाएगा। प्रदेश के हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक के लगभग 830 पद रिक्त हैं। सरकार ने इन पदों को भी वरिष्ठ एलटी और प्रवक्ता कैडर के शिक्षकों को अंतरिम प्रमोशन देकर भरने की तैयारी की है। इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने जा रही है।

234 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त

मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक अहम जानकारी साझा करते हुए यह भी बताया कि लंबे समय से अनुपस्थित 234 डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही, ऐसे ही 55 अन्य डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि अनुपस्थित डॉक्टरों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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