उत्तराखंड में देश का पहला एलिवेटेड E-BRTS, सस्ते में मेट्रो जैसा सफर..जानिए बेमिसाल खूबियां

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राजधानी देहरादून में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एलिवेटेड ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। यदि यह परियोजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो यह देश का पहला ऐसा मॉडल होगा जिसमें सड़क के ऊपर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाकर विशेष ई-बसों का संचालन किया जाएगा। यह प्रणाली मेट्रो और पारंपरिक बस सेवा के बीच एक संतुलित और किफायती विकल्प के रूप में विकसित की जा रही है।

एलिवेटेड ई-बीआरटीएस एक आधुनिक परिवहन प्रणाली है, जिसमें सड़क के ऊपर पिलर आधारित ट्रैक बनाया जाता है। इस ट्रैक पर उच्च क्षमता वाली इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी, जो सामान्य ट्रैफिक से पूरी तरह अलग होंगी। इससे बसों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के तेज और सुरक्षित होगी। सरकार इसे कम लागत में मेट्रो जैसी सुविधा देने वाला समाधान मान रही है। भविष्य में इस परियोजना को हरिद्वार और ऋषिकेश तक भी विस्तारित करने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।

शियामेन मॉडल से प्रेरित योजना

इस परियोजना की प्रेरणा चीन के शियामेन शहर से ली गई है, जहां वर्ष 2008 में एलिवेटेड बीआरटीएस सिस्टम शुरू किया गया था। यह मॉडल कम लागत, तेज निर्माण और बेहतर यातायात प्रबंधन के कारण सफल साबित हुआ है। देहरादून की भौगोलिक स्थिति भी शियामेन से काफी मिलती-जुलती है, जहां सीमित जगह और बढ़ते ट्रैफिक के कारण इस तरह की प्रणाली अधिक उपयोगी साबित हो सकती है।

ट्रैफिक जाम की गंभीर समस्या

देहरादून में तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है। शहर की सड़कों की चौड़ाई सीमित है, जिससे उनका विस्तार करना मुश्किल है। ऐसे में एलिवेटेड ई-बीआरटीएस एक प्रभावी समाधान बन सकता है। यह न केवल ट्रैफिक दबाव को कम करेगा, बल्कि लोगों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प भी प्रदान करेगा।

ई-बीआरटीएस बसों की प्रमुख विशेषताएं

इस सिस्टम में चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस होंगी। इनमें लगभग 150 यात्रियों की क्षमता वाली लंबी बसें होंगी, जो मेट्रो जैसी भीड़ को संभाल सकती हैं। बसों में कई बड़े दरवाजे होंगे, जिससे यात्रियों का चढ़ना-उतरना आसान और तेज होगा। इसके अलावा बसें वातानुकूलित होंगी और इनमें डिजिटल डिस्प्ले, ऑफ-बोर्ड टिकटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। यह प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल होगी, क्योंकि इसमें प्रदूषण बेहद कम होगा।

भविष्य की दिशा और संभावनाएं

सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीरता से काम कर रही है और इसे जल्द धरातल पर उतारने की दिशा में प्रयास जारी हैं। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक उदाहरण बन सकती है। साथ ही यह देश के अन्य शहरों के लिए भी एक नए और किफायती परिवहन मॉडल का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

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