उत्तराखंड: सीमा व्यापार के लिए खुलेगा लिपुलेख दर्रा, चीन में PM मोदी करेंगे नई शुरुवात की घोषणा

पिथौरागढ़: भारतीय विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारत उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे, हिमाचल प्रदेश में शिपकी ला दर्रे और सिक्किम में नाथू ला दर्रे के माध्यम से चीन के साथ सीमा व्यापार फिर से शुरू होगा। पिछले हफ्ते विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बीजिंग में पोलित ब्यूरो सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी के साथ विस्तृत बातचीत की। ये बातचीत द्विपक्षीय संबंधों के प्रति दूरदर्शी दृष्टिकोण और एक स्थिर एवं रचनात्मक संबंध बनाने की आवश्यकता पर थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन के साथ लंबित सीमा विवादों को सुलझाने के लिए इस सप्ताह एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। चीनी विदेश मंत्री वांग यी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ वार्ता के लिए भारत आने वाले हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद यह पहली ऐसी बैठक होगी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि बीजिंग मतभेदों को उचित तरीके से निपटाने और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ऐतिहासिक है लिपुलेख दर्रा

लगभग 5,334 मीटर (17,500 फीट) की उंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड में स्थित एक महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रा है जो भारत और तिब्बत (चीन) के बीच सीमा पर स्थित है। यह दर्रा पिथौरागढ़ जिले में व्यास घाटी में है और कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह दर्रा उत्तराखंड को तिब्बत के पुरंग शहर से जोड़ता है। लिपुलेख दर्रा प्राचीन काल से व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और साधु संतों द्वारा उपयोग किया जाता रहा है। वर्तमान में भारत-चीन व्यापार और कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रे का उपयोग किया जाता है।

फिर जुड़ेंगी चीन के साथ उड़ानें, यात्रा, व्यापार और राजनीति

पांच साल के अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने के एक और महत्वपूर्ण कदम की भी तैयारी चल रही है। चीन ने पिछले गुरुवार को घोषणा की थी कि वह जल्द से जल्द हवाई यातायात बहाल करने के लिए भारत के साथ बातचीत कर रहा है। लिन जियान ने कहा कि दोनों देश सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने के लिए नियमित संपर्क में हैं और इस मामले पर गंभीरता से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उड़ानें फिर से शुरू होने से यात्रा सुगम होगी, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और आपसी सहयोग गहरा होगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि दोनों पक्ष अपने नेताओं के बीच हुए समझौतों को लागू करने के लिए काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी और जिनपिंग की रूस में हुई मीटिंग

रूस के कज़ान में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक के बाद ये कदम उठाया गया है। अब, रिपोर्टों के मुताबिक, 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक तियानजिन में होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन रिश्तों की नई शुरुवात की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। 2020 में कोविड-19 महामारी और पूर्वी लद्दाख में सीमा पर हुई झड़पों के कारण रुकीं उड़ानों के फिर से शुरू होने से यात्रा, व्यापार और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ राजनयिक जुड़ाव को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। एशिया के भीतर एक मजबूत साझेदारी शुरू की जा सकती है।
पिथौरागढ़ जिले में व्यास घाटी में लिपुलेख दर्रे के जरिये, पर्वतीय व्यापार मार्ग को फिर से खोलने से चीन के साथ उच्च-स्तरीय राजनयिक संपर्क और हवाई सेवाओं की बहाली के साथ ही एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों का पुनर्निर्माण होगा, विशेष रूप से तियानजिन में होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन, इस नए रिश्ते को निर्धारित करने का एक महत्वपूर्ण क्षण होगा।

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