रुद्रप्रयाग: Acharya Balkrishna इन दिनों Ransi village में स्थित Rakeshwari Devi Temple में नवरात्र के पावन अवसर पर विशेष पूजा-अनुष्ठान कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ देवी आराधना की और क्षेत्र में सुख-समृद्धि की कामना की।
नवरात्र के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने नौ दिनों तक निराहार रहकर तपस्या की। नवमी के दिन कन्या पूजन किया, भैरवनाथ पूजा के साथ अनुष्ठान पूर्ण किया और हवन-पूजन के माध्यम से विश्व शांति की कामना की। उनकी इस साधना को स्थानीय लोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
राकेश्वरी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता
राज्य समीक्षा के साथ खास बातचीत में आचार्य बालकृष्ण ने हिमालय को ऋषि-मुनियों की तपोभूमि बताते हुए कहा कि वे रांसी स्थित राकेश्वरी देवी मंदिर में नवरात्र के अवसर पर विशेष पूजा और अनुष्ठान कर रहे थे। नवमी के दिन उन्होंने कन्या पूजन और भैरवनाथ पूजा भी की। यहां की ऊर्जा और आयुर्वेद का गहरा संबंध है। केदारघाटी क्षेत्र को उन्होंने विशेष रूप से साधना और ध्यान के लिए उपयुक्त बताया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, राकेश्वरी देवी मंदिर का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि यहां चंद्रमा को रोग से मुक्ति प्राप्त हुई थी, जिसके कारण यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
शक्तिपीठों में अक्सर पूजा करते हैं आचार्य बालकृष्ण
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि वे हर नवरात्र में देश के अलग-अलग शक्तिपीठों में अनुष्ठान करते हैं। इस बार उन्होंने नौ दिनों तक निराहार रहकर साधना भी की। उन्होंने संकेत दिया कि आगे भी केदार घाटी के अन्य देवी मंदिरों में हवन-पूजा करेंगे। केदारघाटी के अन्य देवी मंदिरों में पूजा और हवन करने की योजना बना रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।









