शाबाश भुली: पिता के निधन के बाद बेटी ने संभाला घर, टैक्सी की स्टेयरिंग थामकर बदली किस्मत

पौड़ी गढ़वाल: पौड़ी गढ़वाल जिले के चौबट्टाखाल क्षेत्र के गिंवली गांव की रहने वाली सानिया राणा आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं। जहां आमतौर पर टैक्सी चालक के पेशे में महिलाओं की संख्या बेहद कम होती है, वहीं सानिया ने इस धारणा को तोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है।

सानिया के पिता कमलेश सिंह राणा, जो खुद टैक्सी चालक थे, का इसी वर्ष निधन हो गया। परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन सानिया ने हार नहीं मानी। पिता की तेरहवीं के बाद ही उन्होंने उनकी कार का स्टेयरिंग संभाल लिया और परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।

संघर्ष के बीच लिया बड़ा फैसला

पिता की मौत के बावजूद सानिया ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया और टैक्सी चलाना शुरू कर दिया। आज वह सतपुली, नौगांवखाल और चौबट्टाखाल जैसे क्षेत्रों में नियमित रूप से गाड़ी चलाती हैं और सवारी लेकर कोटद्वार व देहरादून तक जाती हैं।

पढ़ाई के साथ काम का संतुलन

सानिया चौबट्टाखाल स्थित राजकीय महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह कंप्यूटर कोर्स करना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता ने उन्हें समझाया कि जब घर में ही रोजगार का साधन मौजूद है तो उसी को आगे बढ़ाना बेहतर होगा। सानिया ने कम उम्र में ही अपने पिता से ड्राइविंग सीख ली थी और 18 साल की उम्र में उन्होंने व्यावसायिक लाइसेंस भी बनवा लिया था। आज वही सीख उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा बन गई है। घर में उनकी मां, भाई, बहन और भाभी हैं। सानिया अपने भाई के साथ मिलकर पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभा रही हैं। साथ ही, वह कार के लिए लिए गए बैंक ऋण की किस्त भी नियमित रूप से चुका रही हैं।

महिला सशक्तिकरण की सच्ची मिसाल

सानिया राणा की कहानी यह साबित करती है कि अगर हौसले मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार को संभाला, बल्कि समाज में महिलाओं के लिए एक नई प्रेरणा भी पेश की है।
सानिया राणा ने यह दिखा दिया कि मुश्किल परिस्थितियां इंसान को तोड़ती नहीं, बल्कि मजबूत बनाती हैं। उनकी यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो जीवन में संघर्ष कर रहा है—कि हिम्मत और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।

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