उत्तरकाशी: भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखने वाले उत्तराखंड के गौरव जसपाल राणा अब हमारे बीच नहीं रहे। एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन करने वाले राणा ने खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि कोच के रूप में भी नई पीढ़ी के शूटर तैयार किए। उनके निधन से उत्तराखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में जन्मे अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा का शुक्रवार को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, विदेश यात्रा से लौटने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके निधन की खबर से पूरे भारतीय खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई खिलाड़ियों, कोचों और खेल संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उत्तराखंड का गौरव, भारत का ‘गोल्डन बॉय’
जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं थे, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल चेहरों में गिने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में अनेक विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल कीं और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई।
जसपाल राणा की प्रमुख उपलब्धियां
एशियाई खेलों में भारत के लिए 8 पदक जीते।
कॉमनवेल्थ गेम्स में 15 पदक अपने नाम किए, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं।
1994 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
2006 दोहा एशियन गेम्स में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड (590 अंक) की बराबरी करते हुए स्वर्ण पदक जीता।
चार कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार शानदार प्रदर्शन कर भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल हुए।
भारत का प्रतिनिधित्व 1996 अटलांटा ओलंपिक में किया।
पुरस्कार और सम्मान
जसपाल राणा को उनके शानदार योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले—
अर्जुन पुरस्कार (1994)
पद्मश्री (1997)
द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020)
उत्तराखंड गौरव सम्मान (2025)
मनु भाकर समेत कई सितारों के गुरु
खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। उनकी देखरेख में भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयां मिलीं। विशेष रूप से मनु भाकर ने उनके मार्गदर्शन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की। उनके अनुशासन, तकनीकी दक्षता और खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने की शैली की पूरे खेल जगत में सराहना होती थी।
हमेशा याद रहेगा योगदान
जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी का निधन नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के एक स्वर्णिम युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपने प्रदर्शन, अनुशासन और कोचिंग के माध्यम से लाखों युवाओं को प्रेरित किया। उत्तराखंड ने अपना एक गौरवशाली सपूत खो दिया है, जबकि भारत ने खेल जगत का एक अमूल्य रत्न।
जसपाल राणा की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।









