देहरादून: Dehradun में अब ब्रिटिश कालीन नामों को बदलकर भारतीय पहचान देने की पहल तेज हो गई है। गढ़ी कैंट बोर्ड ने एक अहम प्रस्ताव पास किया है, जिसमें सड़कों और क्षेत्रों के नाम शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखने की सिफारिश की गई है।
देशभर में ब्रिटिश दौर के नामों को बदलकर भारतीय संस्कृति और सैन्य परंपरा से जुड़े नाम देने की मुहिम चल रही है, उसी कड़ी में यह कदम उठाया गया है। देहरादून में गढ़ी कैंट बोर्ड द्वारा क्षेत्र में ब्रिटिश कालीन नामों को बदलने के इस प्रस्ताव को जल्द ही मध्य कमान और फिर Ministry of Defence को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
किन-किन सड़कों के नाम बदलेंगे?
बोर्ड बैठक में कई प्रमुख सड़कों के नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया:-
माल रोड → द्रोणाचार्य मार्ग
यंग रोड → मेजर सोमनाथ मार्ग
बीचर रोड → मेजर धन सिंह थापा मार्ग
शेक्सपीयर रोड → एन.के. भवानी मार्ग
मैकफेरसन रोड → मेजर धन सिंह थापा मार्ग
मेसीनटायर रोड → मेजर सोमनाथ मार्ग
हालांकि न्यू कैंट रोड का नाम यथावत रहेगा।
विंग्स और इलाकों के नए नाम
गढ़ी कैंट क्षेत्र के अलग-अलग विंग्स के नाम भी बदलने का प्रस्ताव है:-
विंग-1 → लाजपत नगर
विंग-2 → तिलक नगर
विंग-3 → भगत नगर
विंग-4 → अंबेडकर नगर
विंग-5 → अटल नगर
विंग-6 → पटेल नगर
विंग-7 → सरोजिनी नगर
स्पेशल विंग → विवेकानंद नगर
जनरल विंग → सोमनाथ नगर
स्मिथ नगर → जसवंत नगर
क्लेमनटाउन का नया नाम ‘शौर्य नगर’
मंगलवार को क्लेमनटाउन कैंट बोर्ड की क्लेमनटाउन का नया नाम ‘शौर्यनगर’ रखने पर सहमति बनी और इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर मध्य कमान को भेज दिया गया है। इस दौरान शिवालिक नगर, दून वैली और शौर्य नगर जैसे तीन विकल्प सामने आए थे, जिनमें से शौर्य नगर को अंतिम रूप से चुना गया। नामित सदस्य भूपेंद्र कंडारी के अनुसार, केंद्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद यह नाम आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा।,
आपको बता दें कि क्लेमनटाउन का इतिहास 20वीं सदी से जुड़ा है। इसका नाम फादर आर.सी. क्लेमेन्ट के नाम पर पड़ा था, जो वर्ष 1934 में यहां आकर बसे थे। छावनी परिषद के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के समय इस क्षेत्र का इस्तेमाल इतालवी युद्ध बंदियों के शिविर के रूप में भी किया गया था। बाद में, वर्ष 1941 में इसे औपचारिक रूप से छावनी बोर्ड के अधीन लाया गया।









