देहरादून में रात की रंगीनियों का नेटवर्क, पॉश इलाकों में बेधड़क होती है डील; ऑनलाइन बुकिंग का मायाजाल

देहरादून: Dehradun में शुरू की गई होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय परिवारों को अतिरिक्त आय देना और पर्यटकों को घर जैसा अनुभव उपलब्ध कराना था। लेकिन समय के साथ यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आने लगी। अब कई जगहों पर होमस्टे की आड़ में पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कई होमस्टे पूरी तरह होटल की तरह चलाए जा रहे हैं। भवन मालिक खुद वहां नहीं रहते, बल्कि पूरे मकान को किराये या लीज पर बाहरी संचालकों को दे दिया जाता है। इन जगहों पर देर रात तक पार्टियां होती हैं, बाहरी लोगों का ठहराव होता है और नियमों की खुली अनदेखी की जाती है। धीरे-धीरे इनका स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और निजी एजेंसियों के माध्यम से इन होमस्टे का प्रचार किया जा रहा है, जिससे यह पूरी तरह व्यावसायिक कारोबार बन चुका है। लोग सीधे कमरे बुक कर रहे हैं, जिससे स्थानीय निगरानी और नियमों का पालन और भी कमजोर हो गया है। शुरुआत में बड़े मकानों को होमस्टे के रूप में पंजीकृत कराया गया, लेकिन बाद में उनमें अतिरिक्त कमरे जोड़ दिए गए और होटल जैसा संचालन शुरू कर दिया गया। मालिक की जगह बाहरी मैनेजर संचालन करने लगे। ऑनलाइन बुकिंग के जरिए सीधे किराये पर कमरे दिए जाने लगे और इन स्थानों पर पार्टियां व निजी आयोजन भी होने लगे।

पॉश इलाकों में तेजी से फैलाव

दून के कई प्रमुख और पॉश इलाकों में होमस्टे तेजी से बढ़े हैं। राजपुर और Mussoorie रोड, सहस्रधारा रोड, वसंत विहार, बल्लूपुर, पंडितवाड़ी और अजबपुर जैसे क्षेत्रों में यह ट्रेंड तेजी से देखा गया है। पर्यटन मार्गों और शांत आवासीय कॉलोनियों में इनकी संख्या अधिक बढ़ी है, जहां पर्यटकों की आवाजाही भी ज्यादा रहती है।

प्रशासनिक जांच में कई होमस्टे में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। मसूरी-लंढौर क्षेत्र में कुछ होमस्टे होटल की तरह संचालित होते मिले, जहां रसोई तक नहीं थी।
सिनोला-भगवंतपुर क्षेत्र में कई स्थानों पर मालिक अनुपस्थित पाए गए और पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
ISBT और जीएमएस रोड क्षेत्र में विदेशी नागरिकों को बिना सूचना ठहराने, बारातघर की तरह उपयोग और दस्तावेजों की कमी जैसी अनियमितताएं सामने आईं।
डालनवाला, रेसकोर्स, बल्लूपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी कई होमस्टे या तो बंद मिले या नियमों के विरुद्ध संचालित होते पाए गए।

होटल उद्योग में बदल सकती है योजना

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो होमस्टे योजना पूरी तरह अपने उद्देश्य से भटक जाएगी। इससे स्थानीय परिवारों को मिलने वाला लाभ समाप्त हो सकता है और यह पूरी तरह होटल उद्योग में बदल सकती है। प्रशासन अब इस मामले में सख्ती बरतने की तैयारी में है। नियमित निरीक्षण, नियमों का सख्त पालन और अवैध संचालन पर कार्रवाई की जाएगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह योजना फिर से अपने मूल उद्देश्य की ओर लौट पाती है या नहीं।
देहरादून में होमस्टे योजना का दुरुपयोग एक गंभीर मुद्दा बन गया है। जहां यह योजना स्थानीय विकास के लिए बनाई गई थी, वहीं अब यह कई जगहों पर अवैध गतिविधियों का केंद्र बनती जा रही है। प्रशासन की सख्ती और निगरानी ही तय करेगी कि इस योजना का भविष्य क्या होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here