चमोली: गैरसैंण तहसील क्षेत्र के मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विधानसभा परिसर भराड़ीसैंण से सटे इस गांव में एक परिवार पिछले करीब छह महीने से अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाने के लिए तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि राजस्व विभाग को पहले से जानकारी देने के बावजूद उनकी जमीन की बिक्री कर दी गई। परिवार ने मामले की शिकायत तहसील प्रशासन से लेकर क्षेत्रीय विधायक और गढ़वाल कमिश्नर तक की है।
पीड़ित सुरेंद्र सिंह पुत्र मदन सिंह, निवासी सारकोट का आरोप है कि गांव के एक व्यक्ति ने इसी साल 13 मई को उनकी करीब 20 नाली पैतृक भूमि गलत तरीके से बेच दी। सुरेंद्र सिंह के अनुसार, उनके पिता मदन सिंह ने जमीन की रजिस्ट्री से पहले ही 6 अप्रैल को तहसील गैरसैंण में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद कथित रूप से जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि शिकायत के बावजूद भूमि बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ना कई सवाल खड़े करता है।
पहले भी सामने आया था मामला
बताया गया कि मई महीने में मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट के जूनियर हाईस्कूल के पास करीब 50 नाली भूमि की बिक्री का मामला सामने आया था। इसमें से 15 नाली भूमि की रजिस्ट्री एक एनजीओ के नाम होने के कारण निरस्त किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद शेष भूमि की खरीद-फरोख्त को लेकर भी सवाल उठे। पीड़ित सुरेंद्र सिंह का आरोप है कि कुल 35 नाली भूमि में से करीब 20 नाली जमीन ऐसी बेची गई, जिस पर भूमि बेचने वाले व्यक्ति का वर्तमान में कब्जा नहीं था।
पीड़ित ने बताई खसरा नंबरों वाली जमीन
पीड़ित पक्ष के अनुसार, खाता-खतौनी संख्या 0093 में शामिल खसरा नंबर 663, 671 और 672 की करीब 12 नाली भूमि उनके परिवार से संबंधित है। इसके अलावा खसरा नंबर 664 और 668 की करीब 8 नाली भूमि को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। पीड़ित का आरोप है कि कुल मिलाकर करीब 20 नाली जमीन को गलत तरीके से बेच दिया गया।









