दलित अपमान का झूठ फैलाकर, कांग्रेस देवभूमि का माहौल और छवि खराब कर रही है : भाजपा
सत्ता की हताशा में कांग्रेस ने झूठ एवं भ्रम की सभी राजनैतिक मर्यादाएं तोड़ी: भाजपा
कांग्रेस को भ्रम फैलाने के बजाय सामाजिक सौहार्द की चिंता करनी चाहिए : खजान दास
देहरादून 29 अगस्त । भाजपा ने कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों से बचने के लिए जातीय राजनीति को ढाल बनाने का आरोप लगाया है। जो दलितों के नाम पर झूठ फैलाकर, देवभूमि का माहौल और छवि दोनों खराब कर रही है। जबकि भाजपा कभी भी जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर समाज को बांटने का कार्य नहीं करती और न ही इस प्रकार की किसी गतिविधि का समर्थन करती है। लेकिन सत्ता की हताशा में कांग्रेस ने झूठ एवं भ्रम फैलाने में सभी राजनैतिक मर्यादाएं तोड़ दी हैं।
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री एवं पार्टी प्रदेश प्रवक्ता श्री खजान दास ने कहा, पार्टी का सदैव प्रयास रहा है, समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और चारधाम एवं अनेक तीर्थस्थलों की पवित्र भूमि है। यहां समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं को तथ्यों को नकार कर शुद्धीकरण कार्यक्रम को लेकर जनता में भ्रम फैलाना बंद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उक्त कार्यक्रम श्रीराम सेना धर्मार्थ न्यास नामक सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित किया गया था। संस्था के पदाधिकारियों ने स्वयं स्पष्ट किया है कि यह एक सामाजिक संस्था है और इसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। ऐसे में बिना तथ्यों के इस कार्यक्रम को भाजपा से जोड़ना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। श्रीराम सेना धर्मार्थ न्यास ने भी स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के पीछे किसी भी प्रकार की दलित विरोधी भावना नहीं थी। संस्था के अनुसार, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली में लगाए गए कथित इस्लामिक नारों और कथित हिंदू विरोधी तत्वों की मौजूदगी के विरोध में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए कांग्रेस धार्मिक एवं सामाजिक घटनाओं पर झूठ फैलाकर राजनीतिक विवाद का रूप दे रही है। कांग्रेस को ऐसी राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश में भाईचारे, शांति, एकता और सामाजिक सौहार्द की चिंता करनी चाहिए। कांग्रेस की निगाहें दलित मुद्दे पर हैं, लेकिन उसका निशाना कथित मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति को बचाना है। रामलीला मंच से जुड़े विवाद में कथित तौर पर लगाए गए “अल्लाह-हू-अकबर” के नारों को लेकर कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अपने राजनीतिक असहज सवालों से ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस सनातन समाज को बांटने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले अपनी चुप्पी का जवाब दे क्योंकि कांग्रेस दूसरों को दलित विरोधी बताने से पहले अपने इतिहास को देखे। ऐसी ही घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 1952-54 के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की चुनावी हार को लेकर कांग्रेस के पास क्या जवाब है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में डॉ. भीमराव आंबेडकर जी को भारत रत्न नहीं दिया गया। बाद में वर्ष 1990 में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संविधान निर्माता को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे, जबकि कांग्रेस शासनकाल में अपने कई नेताओं को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि आज डॉ. आंबेडकर जी के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस को अपने अतीत का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस का दलित प्रेम केवल सियासी बयानबाजी तक सीमित है। दलित सम्मान की बात करने वाली कांग्रेस को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए।
उन्होंने प्रदेश में कांग्रेस के दलित विरोधी इतिहास का एक पन्ना खोलते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, जो स्वयं दलित समाज से आते हैं, जब कांग्रेस छोड़कर गए थे, तब कथित रूप से उनकी तस्वीर को जमीन पर पटककर कांग्रेस भवन से बाहर फेंके जाने का व्यवहार किया गया था। उन्होंने कहा कि यह घटना कांग्रेस के दलित सम्मान के दावों पर सवाल खड़े करती है।
खजानदास ने रुद्रपुर में मौलाना की कथित धमकी को लेकर भी कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले पर चुप क्यों है? कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी गंभीर घटना पर उसके नेता खुलकर विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस की राजनीति वोट बैंक के दबाव में इतनी मजबूर है कि वह धमकी और भय की राजनीति के खिलाफ भी बोलने से बच रही है? कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह धमकी और भय की राजनीति के खिलाफ है या नहीं।
पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य मंत्री एवं भाजपा अनुसूचित मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष बलबीर घुनियाल, अनुसूचित मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष रविंद्र वाल्मीकि, प्रदेश महामंत्री विनोद लक्खा, डाक्टर सुमेर चंद रवि, रणजीत सिंह जाखी, दयाराम सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे।









