केदारनाथ रावल पर उठे सवाल, जांच समिति गठित करने की मांग

केदारनाथ धाम के रावल पद की मर्यादा और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संत वीर शिवाचार्य हीरा मठ ने वर्तमान रावल द्वारा उत्तराधिकारी घोषित किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के खिलाफ बताया है।उन्होंने कहा कि रावल पद किसी की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह सरकार और बीकेटीसी ट्रस्ट के अधीन है। इसलिए उत्तराधिकारी नियुक्ति का अधिकार भी बदरी-केदार मंदिर समिति के नियमों के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान रावल ने पूर्व में उत्तराधिकारी बनते समय दक्षिण भारत से प्राप्त होने वाले धन को बीकेटीसी में जमा कराने की बात लिखित रूप में कही थी, लेकिन आज तक एक रुपया भी जमा नहीं कराया गया।संत वीर शिवाचार्य ने यह भी कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के दौरान भी मंदिर संकट में था, लेकिन उस समय रावल की ओर से मंदिर समिति को कोई आर्थिक सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण भारत में केदारनाथ के नाम पर संपत्तियां और धन एकत्र किया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष से मांग की कि पांच सदस्यों की एक जांच समिति गठित की जाए, जो दक्षिण भारत जाकर सभी तथ्यों और संपत्तियों की जांच करे और रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

 

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